Friday, May 9, 2014

New tradition of collective marriages in Meghs - मेघों में सामूहिक विवाह की नई परंपरा

हमारा बहुत सा धन अनावश्यक धार्मिक और सामाजिक दिखावे में बर्बाद होता है. राजस्थान के मेघों/मेघवालों ने मृत्युभोज की प्रथा को काफी सीमा तक बंद कर दिया है. अब वे सामूहिक विवाह को एक स्वस्थ परंपरा के रूप में अपना रहे हैं. यह बहुत बढ़िया तरीका है जिससे वर और वधु पक्षों का धन बचता है और उस धन को बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण पर व्यय किया जा सकता है. ऐसे ही एक समारोह में मुझे अखिल हाड़ौती मेघवाल युवा समिति की ओर से निमंत्रण पत्र मिला था जिसमें कुछ विशेष और ज़रूरी बातें लिखी हैं. उसके स्कैन यहाँ लगा दिए हैं ताकि सामाजिक कार्यकर्ता इसे विस्तार से जान सकें. मुझे किसी ने बताया था कि बटाला, पंजाब में एक मेघ सज्जन श्री अशोक भगत कबीर जयंती के अवसर पर प्रति वर्ष सामूहिक विवाहों को संपन्न कराते हैं. यह स्वागत योग्य है. क्या संभव है कि मेघों में ये सभी शादियाँ कबीरपंथी पंरपरा के अनुसार कराई जाएँ ताकि धन-संसाधनों की और भी बचत हो और मेघ पुरोहितों की परंपरा और भी दृढ़ हो सके.


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