Monday, August 5, 2013

History of Meghvansh - मेघवंश का इतिहास



मेघ-सत्ता की अवनति ने मेघों को अपने निवास स्थान से पलायन करने को मजबूर कर दिया था. आज के 1500-2000 ईस्वी वर्ष पूर्व भारतीय समाज की स्थिति कैसी भी रही हो, फिर भी वे एक कबीले की तरह इधर-उधर घूमते थे. हारे हुए लोगों का भटकना इतिहास में कोई अनोखी घटना नहीं होती है. कई शासक कौमों ने अपनी अवनति के बाद इस त्रासदी को भोगा है एवं इस त्रासदी में पिसते-पिसते यह शासक कौम शासित कौम बन गई. राजस्थान में मेघों का आगमन राजपूतों के इतिहास पटल पर उभरने से बहुत पहले हो चुका था एवं राजस्थान के प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर उनका आधिपत्य-इतिहास प्रमाणित है. राजपूत तो मध्यकाल में इतिहास पटल पर दिखते हैं, परंतु मेघ कौम तो उससे कई शताब्दियाँ पूर्व शासक कौम प्रमाणित हो चुकी थी. इसलिए राजपूतों से मेघवालों की उत्पत्ति का प्रश्न निर्मूल है, जबकि सच्चाई यह है कि कई शासक या पराजित कौमों ने इस समाज में आश्रय पाया है.

(श्री ताराराम द्वारा लिखित पुस्तक 'मेघवंश – इतिहास और संस्कृति' भाग-1, पृष्ठ 69-70 से)
पुस्तक मूल्य रु.200/-, संपर्क - सम्यक् प्रकाशन, 32/3, पश्चिमपुरी, नई दिल्ली-110063-8, मोबाइल नं. 098102 49452, 098101 61823 
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