Saturday, June 23, 2012

Unity of SCs, STs and OBCs - अ.जा., अ.ज.जा. और पिछड़ी जातियों की एकता


कई विद्वानों ने इस विषय पर विचार-विमर्ष किया है विशेषकर बहुजन हिताय दर्शन के तहत जिसका बहुत महत्व है. मैंने भी अपने चिट्ठों में इस विचार-धारा के समर्थन में लिखा है.

लेकिन जब समाज की व्यावहारिक स्थिति की बात आती है तो दर्शन अलग खड़ा दिखता है और वस्तुस्थिति अलग.

यह ऐतिहासिक तथ्य है कि स्वयं को सुरक्षित रखते हुए ब्राह्मणों ने दलित जातियों और जन जातियों पर सीधे हमले स्वयं तो कम ही किए हैं. अधिकतर हमले अन्य पिछड़ी जातियों के लोग ही करते आए हैं. यह ब्राह्मणवाद का ऊंच-नीचवादी हथकंडा है जो भारत के मूलनिवासियों को बाँटने और उन्हें एक-दूसरे के हाथों मरवाने में सफल होता आया है.

यही फैक्टर है जो आज अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ी जातियों की एकता की संभावना पर प्रश्न चिह्न लगाता है. देश के दूर-दराज़ के गाँवों में फैली पुरानी और जातिगत हिंसक प्रवृत्तियाँ इस एकता को रोकने के लिए हमेशा कटिबद्ध रहती हैं. कुछ राज्यों में अन्य पिछड़ी जातियाँ अब तेज़ी से सत्ता की ओर बढ़ रही हैं और अनुसूचित जातियाँ तथा अनुसूचित जनजातियाँ उनके मुँह की ओर ताक रही हैं कि शायद बुलावा आ जाए. उधर अन्य पिछड़ी जातियाँ इनकी ओर देख तक नहीं रहीं.

देखते हैं स्थिति कैसे बदलेगी. इसे बदलना तो होगा.

Monday, June 18, 2012

Megh community felicitates Bhagat Chuni Lal - मेघ समुदाय ने भगत चूनी लाल का नागरिक अभिनंदन किया


ऑल इंडिया मेघ सभा, चंडीगढ़ ने 17 जून, 2012 को अंबेडकर भवन, सैक्टर-37, चंडीगढ़ में मेघ भगत परिवारों का एक गेटटुगेदर आयोजित किया जिसमें भगत श्री चूनी लाल, माननीय मंत्री लोकल बॉडीज़ और मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पंजाब सरकार का मेघ समुदाय की ओर से नागरिक अभिनंदन किया गया.

वातावरण में अपूर्व उत्साह था. उनके आते ही सभागार का माहौल भगत चूनी लाल ज़िंदाबाद के जयकारों से गूँज उठा. इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने श्री चूनी लाल जी के राजनीतिक करियर की चर्चा की, इस क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों का उल्लेख किया और उनके करियर की वर्तमान बुलंदियों की जम कर तारीफ़ की गई. वक्ताओं ने भाजपा और शिरोमणी अकाली दल के नेतृत्व को धन्यवाद दिया जिन्होंने भगत जी को वांछित समर्थन दे कर मेघ समुदाय की छवि को भी नई पहचान दी है. साथ ही उन्होंने मेघ भगत समुदाय से अपील की कि वे भविष्य में ऐसी ही एकता का प्रदर्शन करते रहें और विभाजित करने वाली ताक़तों को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ें और अपनी चमकदार पहचान बनाएँ.

भगत चूनी लाल जी के राजनीतिक जीवन में उनके अपने समुदाय द्वारा किया गया उनका यह पहला नागरिक अभिनंदन था और इस पहल का श्रेय ऑल इंडिया मेघ सभा, चंडीगढ़ को जाता है.

इस अवसर पर बोलने वालों में सर्वश्री महेंद्र कुमार (आईएएस), यशपाल (आईईएस), राजेश कुमार, (सेवानिवृत्त सुपरिन्टेंडिंग इजीनियर), ऑल इंडिया मेघ सभा के इंद्रजीत मेघ (अध्यक्ष), गोविंद कांडल (सचिव) आदि प्रमुख थे.

श्री गोविंद कांडल ने इस अवसर पर मेघ समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ता श्री गोपीचंद भगत, श्री बुड्डामल भगत, श्री मिल्खीराम भगत (पीसीएस), श्री लेखराज भगत (आईपीएस) आदि द्वारा मेघ समुदाय के उत्थान के लिए किए गए अथक प्रयासों को याद किया और उनका आभार प्रकट किया. उन्होंने ऊँची स्थिति पर बैठे मेघों और इंटरनेट के द्वारा मेघ समाज की सेवा करने वाले सदस्यों का आभार प्रकट किया. 

ऑल इंडिया मेघ सभा की ओर से बोलते हुए श्री इंद्रजीत मेघ ने मुख्य अतिथि श्री चूनी लाल को इस संस्था के एक पुराने और महत्वपूर्ण सपने कबीर मंदिर की याद दिलाई जिसे मेघ भवन के नाम से भी जाना जाता है. भगत जी को बताया गया कि इसके लिए कई प्रयास किए गए हैं लेकिन ज़मीन की कीमतों और राजनीतिक समर्थन के अभाव में यह सपना अभी पूरा नहीं हुआ है. अपने भाषण के दौरान भगत जी ने इस बात को नोट किया और आश्वासन दिया कि इस सपने को हक़ीक़त में बदलने के लिए शीघ्र ही प्रयास शुरू करेंगे. इस माँग को भगत जी के दाहिने हाथ कहे जाने वाले श्री महेंद्र भगत ने भरपूर हामी दी और कहा कि यह सपना पूरा हो कर रहेगा.

हाल ही में पीसीएस परीक्षा में चुने गए युवाओं को बधाई दी गई और बहुत अच्छे अंक लेकर उत्तीर्ण हुए छात्र-छात्राओं को इस अवसर पर सम्मानित किया गया. मंच संचालन श्री राजेश भगत (सेवानिवृत्त सुपरिन्टेंडिंग इजीनियर) ने किया और उन्होंने श्री चूनी लाल जी के सम्मान में अपनी कविताओं का पाठ किया.

कार्यक्रम के अंत में एक प्रीति भोज का आयोजन किया गया. शेष इन तस्वीरों में :-


हमारे हीरो, स्वागतम्
पुष्पगुच्छ से स्वागत

शॉल ओढ़ा कर अभिनंदन किया गया
मुख्य अतिथि का संबोधन
 
मुख्य अतिथि को स्मृति चिह्न
श्री गोविंद कांडल, सचिव, AIMS
श्री यशपाल, पूर्व अध्यक्ष, AIMS
श्री साथी, लीगल एडवाइज़र, AIMS
श्री इंद्रजीत मेघ, अध्यक्ष, AIMS
मंच पर उपस्थिति
श्री महेंद्र कुमार, आईएएस, सैक्रेटरी टू गवर्नर हरियाणा
93% प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली छात्रा का सम्मान
अध्यक्षीय भाषण


श्रोताओं ने एकाग्रता से सुना


महिलाओं की बड़ी उपस्थिति सराहनीय रही
प्रीति भोज

Friday, June 15, 2012

Meghwal Society - मेघवाल समाज ने लिखे सामूहिक विवाह के सावे


देसूरी,17 अप्रेल,2012.  कोट सोलंकियान ग्राम में स्थित हरचंदपीर आश्रम में आयोजित होने वाले मेघवाल समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन को लेकर सावे लिखे गए. श्री मारवाड़ मेघवाल सेवा संस्थान देसूरी शाखा द्वारा आगामी एक मई को आयोजित हो रहे इस आयोजन के दौरान कुल इक्यावन जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे.

कोट सोलंकियान ग्राम में स्थित हरचंदपीर आश्रम में पीर गुलाबदासजी महाराज एवं गादाणा बायोसा मंदिर के प्रमुख प्रतापराम गोयल के सानिध्य व जिला परिषद सदस्य प्रमोदपाल सिंह मेघवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस सावा लेखन कार्यक्रम का शुभारंभ विनायक पूजन के साथ हुआ. इसी के साथ अलखजी, रामदेवजी एवं हरचंदपीर की पूजा अर्चना एवं जैकारों व नगाड़ों, ढ़ोल थाली की गूंज के साथ सावे लिखे गए. इस दौरान महिलाओं द्वारा गाये गए मंगल गीतों के साथ कोट सोलंकियान परगने के दस ग्रामों की ओर से जोड़ों के परिजनों को वर-वधु की बड़ी सहित अन्य वैवाहिक सामग्री का वितरण भी किया गया.

संस्थान की देसूरी शाखा के अध्यक्ष फूसाराम माधव ने बताया कि विवाह समारोह के दौरान 108 कलश यात्रा, घोड़ो और हाथी के साथ बंदोली आयोजन होगा.

बैठक में केन्द्रीय संस्थान के पदाधिकारी लक्ष्मण बेगड़, मोहनलाल भाटी, भंवरलाल कोलर, सकाराम दहिया, संस्थान की देसूरी शाखा के उपाध्यक्ष एड़वोकेट श्रीपाल मेघवाल, विनोद मेघवाल, रतन भटनागर, प्रेम भटनागर, पूर्व जिला परिषद सदस्य मोतीलाल परिहार, चिरपटिया सरपंच चौथाराम, मगरतलाव की पूर्व सरपंच श्रीमती छगनीदेवी, दलित नेता बस्तीमल सोनल, भंवरलाल जोजावर, विवाह समारोह समिति के पदाधिकारी पनोता से भलाराम मोबारसा, किकाराम इकरिया, दौलाराम मोबारसा, तेजाराम इकरिया, कोट सोलंकियान से जालाराम चौहान, वीरमराम मेसंड़, रूपाराम परमार, नया गांव से वरदाराम, जीवाराम चौहान, कोलर से मांगीलाल पंवार, किकाराम, शंकरलाल भोपा, मोहनलाल पंवार, मगरतलाव से पुकाराम परमार, मांगीलाल मगरतलाव, गुड़ा गोपीनाथ से शंकरलाल, गुड़ा दुर्जन से सवाराम, मेवीखुर्द से डूंगाराम व सुखाराम तंवर, सोनाराम, उदाराम सहित हजारों की संख्या में मेघवाल समाज के लोग मौजूद थे.

श्री प्रमोद पाल सिंह, सदस्य  जिला परिषद, पाली द्वारा प्रेषित
Pramodpal Singh Meghwal

Friday, June 8, 2012

Kabir Prakashotsav - कबीर प्रकाशोत्सव - श्रद्धा v/s मौसम


जून 15, 2010 को सत्गुरु कबीर साहेब का प्रकाशोत्सव पैरेड ग्राऊँड जम्मू में मनाया जा रहा था. यह उत्सव देखने मैं जम्मू गया था.
सिर पर थी कड़ी धूप और छोटे-छोटे बच्चे हाथों में जय कबीर के झंडे लिए खड़े थे. मैंने उन्हें फोटो के लिए अनुरोध किया तो उन्होंने चेहरे ऊपर उठा कर धूप को गालों पर लिया और चिलचिलाती धूप ये बच्चे कैमरे के सामने मुस्कराना नहीं भूले. 04 जून, 2012 को भी वही परिस्थितियाँ थीं. 

ऐसे बड़े समागमों के लिए जून का मौसम उचित नहीं कहा जा सकता. 43-45 डिग्री तापमान में सुबह से सायं तक हजारों लोग बैठे थे. वे म्युनिसपैलिटी के टैंकरों का पानी पी रहे थे (मेरी बात आप समझ रहे होंगे) और पानी की कई-कई बोतलें 15 रुपए में खरीद कर पी रहे थे. उनकी श्रद्धा प्रशंसनीय थी. जो लोग इतने गर्म मौसम में घर से नहीं निकले उनकी संख्या जानना महत्वपूर्ण होगा. हालाँकि तीन-चार हज़ार की संख्या अच्छी कही जा सकती है लेकिन यह उम्मीद से कम रही.

कई महापुरुषों के जन्मदिन मई-जून में आते हैं. यानि अति गर्म मौसम. 600 साल पहले के मौसम और आज के मौसम में बहुत फर्क है. तब इतनी गर्मी नहीं होती थी. 45 डिग्री की गर्मी ऐसे समागमों के लिए हतोत्साहित करने वाला फैक्टर है. ऐसी तेज़ गर्मी श्रद्धा को चाहे प्रभावित न करे लेकिन सहभागिता को अवश्य कम करती है.

बेहतर है कि बदले हालात में संतों से संबंधित समारोहों को छबीलें लगा कर सुहावना बना लें और मुख्य समागम को नया नाम दे कर अक्तूबर-नवंबर जैसे महीने में शिफ्ट कर लें. यह समय का ज़ोरदार तक़ाज़ा है.

मैं हैरान हूँ कि महात्मा बुद्ध और हमारे अधिकतर संतों का जन्मदिन हर साल पू्र्मिमा को ही क्यों पड़ता है. अक्तूबर-नवंबर की अष्टमी और नवमी को पकड़ो. धार्मिक-सामाजिक समागमों के लिए ये दिन बहुत अच्छे हैं.

(आयोजक लोगों की श्रद्धा देखें लेकिन यह संगठनात्मक कार्य के लिए हानिकारक है.)
है जुनून, हम सूरज पे नाच आते हैं

Wednesday, June 6, 2012

614th Anniversary of Kabir – कबीर का 614वाँ प्रकाशोत्सव


मेघ भगतों की सामाजिक संस्था ‘Bhagat Mahasabha भगत महासभा, जम्मू पिछले चार वर्ष से कबीर का प्रकाशोत्सव पैरेड ग्राऊँड, जम्मू में मनाती आ रही है. वर्ष 2010 में मैंने जम्मू में 612वें प्रकाशोत्सव का कार्यक्रम देखा था. मेघ भगतों का इतना बड़ा सामाजिक-धार्मिक समागम उससे पूर्व कहीं नहीं देखा था. अतः मेरे दूसरे ब्लॉग MEGHnet की यह पहली पोस्ट बनी.

इस वर्ष भी जम्मू का पारा 44-45 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा था और आयोजन की तिथि (04-06-2012) की सूचना मिल चुकी थी. डॉ. ध्यान सिंह से बात हुई और हम दोनों जम्मू पहुँचे. वे इस कार्यक्रम को देखने के लिए बहुत उत्सुक थे. 03-06-2012 को सायं हम पैरेड ग्राऊँड में गए जहाँ भगत महासभा के कार्यकर्ता आवश्यक प्रबंध करा रहे थे. डॉ. ध्यान सिंह शोधकर्ता हैं. पैरेड ग्राऊँड में वे अपना कार्य जारी रखे हुए थे. वे लोगों से बातचीत करते रहे, सवाल पूछते रहे और जानकारी साझा करते रहे. उनका एक प्रश्न बहुतों के लिए चौंकाने वाला था जब उन्होंने पूछा कि आप कब से कबीरपंथी हैं. उनके इस कठिन प्रश्न के कई उत्तर आए जिन्हें किसी और अवसर पर लिखने के लिए रख छोड़ा है.

यह देख कर खुशी होती है कि भगत महासभा, जम्मू के कार्यकर्ता युवा हैं. जम्मू क्षेत्र में डॉ. राजेश भगत के नेतृत्व में एक बहुत बढ़िया टीम मेघों की सामाजिक और धार्मिक एकता के लिए सक्रिय है. यह लग़ातार काम कर रही है. सभी कार्यवाहियाँ टीम की भावना के साथ पूरी की जाती हैं. मेरी जानकारी के अनुसार, मेघों के किसी भी अन्य सामाजिक संगठन की अपेक्षा भगत महासभा का यह यूनिट अधिक कार्य कर पाया है और गाँव-गाँव में जा कर, लोगों से रूबरू हो कर एक वर्ष में बीसियों कार्यक्रम करने में सफल हुआ है. इसका मिशन मेघ भगतों को एक मज़बूत मंच देना है. प्राप्त अनुभव के साथ-साथ स्पष्ट दृष्टिकोण से यह टीम अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है.   

04-06-2012 को मुख्य कार्यक्रम था. तवी गर्मी से गड़क रही थी और पैरेड ग्राऊँड तप रहा था. सुबह 10.00 बजे तक लोग आने शुरू हो गए. डेढ़ घंटे में पंडाल भरना शुरू हो गया. फिर जम्मू के आसपास के स्थानों/गाँवों से लोग पहुँचना शुरू हो गए. तीन से चार हज़ार के आसपास लोग एकत्रित हो चुके थे. किसी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में मेघों का इतनी संख्या में पहुँचना और उन्हें देखना सुखद अनुभव रहा. (उल्लेखनीय है कि मेघों के अन्य संगठनों ने इस अवसर पर अलग-अलग स्थानों पर अपने कार्यक्रम आयोजित किए थे.)

इस बार भगत महासभा ने सत्संग और भजनों के कार्यक्रम के अतिरिक्त 90% से अधिक अंक पाने वाले होनहार छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि और जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री श्री तारा चंद के कर कमलों से ट्राफियाँ दिलवा कर उनका सम्मान किया. ऐसे ही केएएस और आईएएस की परीक्षाएँ पास करने वाले युवाओं का भी सम्मान किया गया. इन युवाओं का उत्साह और आत्मविश्वास देखने योग्य था (कुछ फोटो नीचे दिए गए हैं).

इस मौके पर डॉ. ध्यान सिंह, के मेघ भगतों (कबीरपंथियों) पर लिखे गए पहले शोधग्रंथ- पंजाब में कबीरपंथ का उद्भव और विकास- के महत्व को मान्यता देते हुए भगत महासभा ने उन्हें उप मुख्यमंत्री के कर कमलों से सम्मानित किया. डॉ. ध्यान सिंह को कई फोरम सम्मानित कर चुके हैं लेकिन उनके अपने समुदाय की ओर से किया गया यह सम्मान अपनी तरह का पहला था. जहाँ इस सम्मान का डॉ. ध्यान सिंह के लिए महत्व है, वहीं भगत महासभा, जम्मू बधाई की पात्र है और वह अपनी इस पहल पर गर्व कर सकेगी.

भगत महासभा ने उप मुख्यमंत्री महोदय से अपने धार्मिक-सामाजिक कार्यों और विकास के लिए माँगें रखीं. ईश्वर से प्रार्थना है और पूर्ण आशा है कि सरकारी मदद मिल जाएगी.

कुछ बातों को शब्दों की अपेक्षा चित्र बेहतर तरीके से कहते हैं. अतः चित्रों से सुनिए :- 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
   
मीडिया ने इस कार्यक्रम को अच्छी कवरेज दी है, हम सभी मीडिया के आभारी हैं.




श्री तारा चंद भगत के कैमरे में बंद "मैं"