Sunday, May 6, 2012

Meghvansh- One direction - मेघवंश - एक दिशा


कल 05 मई, 2012 को चंडीगढ़ के पास एक गाँव बहलाना में कई मेघवंशी और कबीरपंथी समुदायों के प्रतिनिधियों का एक सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें मेघवंशी समुदायों के परस्पर समन्वय के लिए किए जाने वाले कार्यों की सूची पर विचार-विमर्ष हुआ. इस सेमिनार की अध्यक्षता श्री गोपाल डेनवाल ने की और श्री आर.पी. सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे. कार्यक्रम का आयोजन हिमाचल प्रदेश की संस्था कबीरपंथ महासभा (Kabir Panth Mahasabha) ने किया था.
(From left) S/Sh. Baru Pal, Gopal Denwal and R.P. Singh
इसके अतिरिक्त विभिन्न राज्यों से पधारे प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे जिनका सार-संक्षेप यह है कि मेघवंशी और अन्य दलित सामाजिक संगठनों के साझा धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मंच तैयार करने की आवश्यकता है. इसके लिए शिक्षा और एकता की भावना विकसित करने की तत्काल ज़रूरत है. जातियों के बँटवारे की पूर्वनिर्मित भ्रामक मान्यता को तोड़ना होगा. जानना होगा कि अनुसूचित जातियाँ, जनजातियाँ और अन्य पिछड़ी जातियाँ वास्तव में एक ही हैं. इस नकली विभाजन को मन से निकालना होगा. धार्मिक विभाजन की दीवारों को खंडित करके आत्म सम्मान के भाव को सशक्त करना होगा.
Gopal Denwal addressing the gathering
अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री गोपाल डेनवाल ने कहा कि विभिन्न नामों में बँटा मेघवंशी समाज आपस में नाम पर ही भिड़ जाता है. इस प्रवृत्ति को तोड़ना ज़रूरी है. नाम अलग होने से कुछ नहीं होता बल्कि सभी मेघवंशी समुदायों का आपस में मिल कर शिक्षा और आर्थिक विकास का प्रबंध करना महत्वपूर्ण है. इसके लिए सामाजिक-धार्मिक-राजनीतिक संगठन की कोशिशें तेज़ होनी चाहिएँ.

इस अवसर पर विभिन्न राज्यों से पधारे अन्य वक्ताओं में सर्वश्री/सुश्री जसविंदर कौर, बारू पाल, हरबंस लाल लीलड़, इंद्रजीत मेघ, प्रीतम सिंह, त्रिलोक चंद, प्रो. कायस्थ, मस्त राम, गणपतराय, रमेश, भारत भूषण आदि थे.
H.R. Leelad

Prof. Kayastha

R.P.Singh's address to participants.
विशेष नोट – मेघ भगतों के संगठन ऑल इंडिया मेघ सभा, चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व श्री इंद्रजीत मेघ ने और भगत महासभा, जम्मू का प्रतिनिधित्व श्री भारत भूषण ने किया.
(From to left to right) S/Sh K.C. Bhagat, Darshan Lal Bhagat and Inderjit Megh represented All India Megh Sabha, Chandigarh.

मेघवंशियों का समाचार-पत्र 'दर्द की आवाज़' ने रुचि जगाई



एक विस्तृत नोट नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है.









     

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