Tuesday, November 22, 2011

You did it rightly Mayawati


यू.पी. के बँटवारे का आइडिया पुराना नहीं है. महीने भर पहले मीडिया ने स्टंटी खबर निकाली कि चुनाव से पहले मायावती यू.पी. के चार अलग-अलग राज्य बनाने का प्रस्ताव ला सकती है. लेकिन मीडिया को पता नहीं था कि उसका लगाया गया राजनीतिक क़यास माया के हाथ में इतनी जल्दी राजनीतिक हथियार बन जाएगा है. और माया ने कर दिया. मीडिया (इसके आक़ा) तड़प उठे. माया के विरुद्ध वातावरण बनाने के लिए काफी पैसा मीडिया ने/मीडिया में झोंका. मीडिया को बार-बार फोन करके उसे अइडियाज़ दे रहे घरानों में अफ़सोस की लहर है. ख़ैर यह राजनीति है और माया मज़बूत है.

प्रस्तावित विभाजन को मैं एक और कोण से भी देखता हूँ. पूर्वांचल में खास बात न होती तो मोती लाल नेहरू का परिवार कश्मीर से आकर इस अति पिछड़े क्षेत्र में क्यों बसता. यह क्षेत्र ब्राह्मणों की राजनीति का केंद्र रहा है और इस उद्देश्य से वहाँ पैसे और माफ़िया शक्ति की कमी कभी नहीं रही. बुंदेलखंड में ऐसी कौन-सी बात है कि बीजेपी इसके गठन से पहले ही विरोध में उतर आई है. यहाँ पिछड़ों के वोट काफी अधिक हैं. अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश में ऐसी कौन-सी कमी है जो समाजवादी पार्टी को मंज़ूर नहीं. इनमें माया का प्रभाव अधिक पड़ा है. फिलहाल राजनीतिक दलों की परेशानी यह है कि यू.पी. का विभाजन यदि हो गया तो उत्तर भारत के चार राज्यों में उन्हें बीएसपी का सामना करना पड़ेगा जिन्होंने वृहत्तर यू.पी. के तौर पर माया का शासन देखा है.

इसी लिए केंद्र में कांग्रेस या बीजेपी की सरकारें इस प्रस्ताव को जल्दी से पास करने वाली नहीं हैं. तथापि इससे मायावती को राजनीतिक लाभ अवश्य होगा.

Thursday, November 17, 2011

Megh Mahakumbh organized - मेघ महाकुंभ का आयोजन

राजस्थान में श्री गोपाल डेनवाल, एक सशक्त सामाजिक कार्यकर्ता और श्री आर.पी. सिंह, (पुस्तक 'मेघवंश : एक सिंहावलोकन' के लेखक) के नेतृत्व में दिनाँक 27 नवंबर, 2011 को जयपुर में मेघ महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है. इसमें देश भर से मेघवंशियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे. इस अवसर पर बहुत ही सुंदर मेघ भगवान की आरती भी प्रचारित करने की संभावना है. इसकी एक फाइल श्री आर.पी. सिंह ने भेजी है जिसे आपके साथ शेयर कर रहा हूँ. इसका लिंक नीचे दिया गया है. आप इसे डाऊनलोड करके सुन सकते हैं.

मेघ आरती